Thursday, April 30, 2009
Vodafone India Cricket Commentary TV Commercial, featuring the ZooZoos!
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Mumbai airport Shahrukh Khan news story KKR questions April 29 2009
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Wednesday, December 3, 2008
What We Have To Do After Mumbai Terror Strike...
Dear Friends...
Though, it doesn't match with the theme of this blog, but it is really important and necessary....
Tell me what u think about reactions of mumbai terror strike....
well i can tell u what i think... tell me r u thinking in same way...
सेना अध्यक्षों की सलाह से एक कमांडो फोर्स गाठी जाए जिसमें मौजूदा कमांडो को शामिल करें और आतंक से लड़ने के लिए विशेष विभाग हो, जो किसी मंत्री या नेता के अधीन काम न करे। सारे राजनीतिक दल शपथ पत्र प्रस्तुत करें कि चुनाव में कोई भी जीते इस विशेष दस्ते के काम में दखल नहीं देगा। कमांडो दल केवल जल, थल और वायुसेना अध्यक्षों के अधीन रहेंगे। इस तरह राजनीति से पूरी तरह मुक्त संगठन ही वर्तमान आतंकवादी संगठनों से लड़ सकता है। इसे उच्चतम वेतन पाने वाला व्यवसायी संगठन बनाना होगा जिसे टेंडर निकालकर घटिया हथियार खरीदने पर बाध्य नहीं होना पड़े।
A commando force has to be established in guidance of all army chiefs, and existing commandos should be included in it. There should be a separate department to fight against terror, which will not be working under any minister or leader. All political parties should produce an affidavit, that whom so ever be in govt, will not interfere in work of this special force. This special force will receive instructions only from chief of air force, military and navy. This kind of organization, which will also be free from any kind of political pressure, can only fight with existing terrorist organizations. This organization should be formed as a highest salary paying professional organization, which will not be required to purchase worst quality weapons by inviting tenders in a government method....
Tell me about your opinion....
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Monday, September 29, 2008
India ! Learn from Sweden...
स्वीडन से सीखने लायक एक मिसाल
गुरचरन दास
Sunday, September 21, 2008 13:44 [IST]
सामयिक. भारतीय स्कैंडिनेविया के बारे में बहुत कम जानकारी रखते हैं। इसमें उत्तरी यूरोप के चार देश- स्वीडन, नार्वे, डेनमार्क और फिनलैंड शामिल है।
हममें से कुछ लोग मोबाइल कंपनी नोकिया के बारे में जरूर जानते हैं जो फिनलैंड की है। भौगोलिक विविधताओं में आनंद लेने वाले लोगों की नजर में यह ऐसी जगह है जहां गर्मी में मध्यरात्रि तक सूरज के दर्शन किए जा सकते हैं।
मेरे जैसे पुराने उदारवादी स्कैंडिनेविया को अत्यंत नियंत्रित, नौकरशाही ग्रस्त और अत्यधिक टैक्स वाली अर्थव्यवस्था के रूप में याद करते हैं। लेकिन आर्थिक सुधारों के बाद वहां का परिदृश्य काफी बदल गया है। अब स्कैंडिनेवियाई देश समाजवाद और पूंजीवाद के मिश्रण का बेहतरीन उदाहरण हंै। यह अपने नागरिकों का सबसे ज्यादा ख्याल रखने वाला समाज है। यह व्यापार करने के लिए भी बेहद अनुकूल क्षेत्र बन चुका है।
अगर आप वहां कोई उद्योग शुरू या बंद करना चाहते हैं तो आपको केवल एक दिन लगेगा। वहां कर्मचारियों को नौकरी पर रखना भी आसान है और निकालना भी। लालफीताशाही न के बराबर है, भ्रष्टाचार का भी उन्मूलन किया जा चुका है। वहां के लोगों का जीवन स्तर दुनिया मंे सबसे ऊंचा है। ऐसे में अगर अन्य देशों को इससे ईष्र्या हो तो कोई अचरज नहीं होगा।
डेनमार्क में श्रम सुधारों ने व्यापार को बेहद आसान बना दिया है। ऐसे ही श्रम सुधारों की भारत में भी दरकार है, लेकिन इस मामले में हम आज भी पिछड़े हैं। भारत के श्रम कानून नौकरियों का संरक्षण करते हैं, जबकि डेनमार्क के कानून नौकरियों का नहीं, कर्मचारियों का संरक्षण करते हैं। इससे वहां उद्योगपति और कर्मचारी दोनों ही खुश रहते हैं। इसके विपरीत भारत का व्यवसायी किसी को अधिकृत तौर पर नौकरी पर रखने से डरता है, क्योंकि एक बार नियुक्ति देने के बाद उसे हटाना लगभग असंभव हो जाता है। भारत में तब तक औद्योगिक क्रांति की उम्मीद नहीं की जा सकती, जब तक कि वह बाबा आदम के जमाने के श्रम कानूनों का पूरी तरह से खात्मा नहीं कर देता।
स्वीडन में 1990 के दशक के पूर्वार्ध में हुए शैक्षणिक सुधारों में भारत अपने लिए भी सबक ढूंढ सकता है। स्वीडन में शैक्षणिक सुधार दो चरणों में हुए। पहले चरण में स्कूलों का नियंत्रण स्थानीय प्रशासन के हाथों में सौंप दिया गया। दूसरे चरण में अभिभावकों को सरकारी या निजी स्कूलों में से किसी में भी अपने बच्चे का दाखिला करवाने की छूट दी गई। इसके तहत सरकार अभिभावकों को वाउचर (एक प्रकार की छात्रवृत्ति) देती है। इन वाउचरों को हासिल करने के लिए स्कूलों में प्रतिस्पर्धा होती है क्यांेकि इन्हीं के बदले में उन्हें सरकार से पैसा मिलता है। हर स्कूल की कोशिश बेहतरीन शिक्षा देने की होती है।
स्वीडन का यह स्कूली मॉडल हमारे देश के लिए बेहद प्रासंगिक है जहां सरकारी स्कूलों की विफलता जगजाहिर है। मध्यमवर्ग के लोगों ने काफी पहले ही सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजना बंद कर दिया था। अब तो गरीब भी सरकारी स्कूलों से कन्नी काटने लगे हैं, अपने बच्चों को सस्ते निजी स्कूलों में डालने लगे हैं। यदि हमारे यहां का कोई राजनेता स्वीडन के इस स्कूली पैटर्न का अनुसरण करे तो यकीन मानिए, वह कभी चुनाव नहीं हारेगा।
इससे मध्यम वर्ग से लेकर गरीब परिवार सब खुश होंगे क्योंकि सभी को शिक्षा के समान व बेहतर अवसर मिलेंगे। जिस स्कूल का शैक्षणिक स्तर जितना अच्छा होगा, उसे उतने ही अधिक वाउचर मिलेंगे और जितने अधिक वाउचर मिलेंगे, शिक्षकों को भी उतना ही अधिक वेतन मिलेगा। इससे सरकारी स्कूलों में भी शिक्षा का स्तर सुधरेगा क्योंकि शिक्षकों का वेतन उनके स्कूलों को मिलने वाले वाउचरों पर निर्भर करेगा।
स्वीडन में स्कूली सुधार एक बड़ी मिसाल है। यह निजी उद्यमियों व निवेशकों के अनुकूल है। इसमें सरकार को भी भूमिका निभाने का मौका मिलता है। वैसे स्वीडिश सरकार अपनी ओर से केवल संसाधन मुहैया करवाकर मूलभूत दिशा-निर्देश तैयार करती है। शेष जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की होती है।
यहां कुछ ऐसे भारतीय भी होंगे जो कहेंगे कि स्वीडन जैसे छोटे-से देश से भारत को भला क्यों सबक सीखना चाहिए? लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि महान देश केवल इसलिए महान बने क्योंकि उन्होंने दूसरों से सीखने में कोई शर्म महसूस नहीं की और जो भी उन्हें ठीक लगा, उसे स्वीकारने में भी देर नहीं लगाई।
(लेखक प्रोक्टर एंड गैंबल इंडिया के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं।)
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Sunday, May 4, 2008
California teen gives birth in shower, walks to hospital
LONG BEACH, Calif. - A 17-year-old girl gave birth secretly at home, then walked four blocks to a hospital with the baby still attached by its umbilical cord."I was just a little nervous" when the labor began, Xochitl Parra said Friday from St. Mary Medical Center as she cradled her 8-pound, 3-ounce son, Alejandro.
The boy was normal and "eating like a champ," said Dr. Jose Perez, director of the Neonatal Intensive Care Unit.
The teenager said she was alone and taking a shower around 5:30 a.m. Wednesday to get ready for school. Then the contractions took over.
"I felt his head coming, so I sit down and pushed so he could come out," she said.
Parra did not call 911 because the home phone was disconnected, and she did not want to wake the neighbors because it was so early. Instead, she wrapped the baby, got dressed and went to the hospital on foot.
"I started walking and jogging to the hospital," she said.
The teen came into the hospital lobby and asked for help, Perez said.
"She still had the placenta and the baby was still attached, so of course everyone said, 'Don't move!'" he said.
Perez praised the girl for taking quick action.
"They could have bled to death; thank God that didn't happen," the doctor said. "She was very clever. She knew what to do. She wrapped the baby up and walked over here."
Parra, a sophomore at Long Beach Poly High, said she had kept her pregnancy a secret because she was afraid her mother would "kick me out of the house." Her mother has now accepted the situation and is going to help the teen care for the baby so she can continue attending school, Parra said.
Perez called the outcome "heartwarming."
"We hear so much negative with teenagers throwing their babies in the Dumpsters," he said. "This baby is fine, and hopefully there will be a happy ending with the extended family."
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Saturday, May 3, 2008
Tuesday, April 22, 2008
Uncensored scene from Maya Memsaab... Now really uncensored!
एक 15 साल पुरानी लो प्रोफाइल फिल्म माया मेमसाब अचानक चर्चा का विषय बन गई है। फिल्म के किसी दृश्य के कारण नहीं, बल्कि सेंसर किए गए एक सीन के कारण। इस सीन में आज के सुपर स्टॉर शाहरूख खान और फिल्म के निर्माता केतन मेहता की पत्नी दीपा मेहता के अंतरंग दृश्य हैं। अब तक न देखे गए इस सीन को किसी वीडियो शेयरिंग साइट यू ट्यूब में डाल दिया। यह वीडियो क्लिब सबके आकर्षण का केंद्र बन गया है।
माया मेमसाब(1993) मंगल पांडे जैसी फिल्म बनाने वाले केतन मेहता की एक आर्ट फिल्म थी। इसकी प्रमुख पात्र माया (दीपा मेहता) कई लोगों से विवाहेतर संबंध बनाती है। इसमें से एक युवक ललित(शाहरुख खान) उससे उम्र में कहीं छोटा है। मौलिक फिल्म में दोनों को बिस्तर पर एक साथ लेटे भर दिखाया गया था। लेकिन हालिया वीडियो दर्शकों को कल्पना करने के लिए कुछ भी नहीं छोड़ता। इसमें दोनों के बीच आक्रमक कामुक दृश्य हैं। यह दृश्य बेहद उत्तेजक हैं।
इस वीडियो के बारे में अभिनेत्री दीपा मेहता ने मुंबई के एक टेबलॉइड को बताया कि उन्हें इस अंतरंग वीडियो के इंटरनेट पर उपलब्ध होने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि हो सकता है किसी ने डीवीडी से लोड करके इसे इंटरनेट पर डाल दिया हो।
कुछ भी सेंसर नहीं था
दीपा ने कहा कि माया मेमसाब पर सेंसर बोर्ड ने कोई कैंची नहीं चलाई थी। यह जैसी की तैसी सिनेमा में गई थी। हालांकि उन्होंने इस कामुक दृश्य के बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उनकी इंटरनेट पर जाकर इसे देखने की कोई हसरत नहीं है। उनके पति और केतन मेहता का कहना है कि यह हो ही नहीं सकता कि इंटरनेट पर फिल्म से अधिक हो।
कोई आपत्ति नहीं
यह सीन 15 साल बाद कैसे इंटरनेट पर आया कैसे दीपा यह सोचकर समय जाया नहीं करना चाहती। उन्हें इससे रत्ती भर भी आश्चर्य नहीं। अगर मौलिक फिल्म में कोई दृश्य था तो उसे इंटरनेट पर आना ही था। आखिर इस पर इतना हंगामा क्यों। 50 साल पहले के मुकाबले भारत आज कहीं ज्यादा आजाद है।
माया मेमसाब(1993)
माया(दीपा महेता) बड़े सपने देखने और अपनी शारीरिक, भावनात्मक हसरतों को पूरा करने में यकीन रखती है। उसके पिता एक बार सीढ़ी से गिर जाते हैं। उनका इलाज करने आए डॉ चारू दास(फारूख शेख) से उसे प्यार हो जाता है। जल्दी ही दोनों शादी कर लेते हैं।
शादी के बाद धीरे-धीरे माया एक छोटे कस्बे और मध्यवर्गीय जीवन से ऊबने लगती है। उसके लिए अपनी हसरतों को रोकना मुश्किल हो जाता है और वह कई लोगों से विवाहेतर संबंध बनाती है। पहले ठाकुर रुद्र प्रताप सिंह(राज बब्बर) के साथ फिर अपनी उम्र से बेहद छोटे ललित(शाहरुख खान) के साथ। फिल्म का अंत अपनी इन अर्थहीन ख्वाहिशों के दलदल में फंसकर माया के आत्महत्या कर लेने के साथ होता है।
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Monday, March 31, 2008
Friday, March 28, 2008
Batista vs. Undertaker vs. Finlay vs. Khali vs. Big Daddy...
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